रातोंरात दौलत

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अध्याय 09 हमें देर हो चुकी है!

धूप के चश्मे वाली औरत ने तंज कसते हुए कहा, “सुना? दूर-दराज़ निकल लो। सामने सड़क पार मैकडॉनल्ड्स है। वहीं तुम्हारी औकात है!”

राइडर की भौंहें तन गईं। क्या ये बदतमीज़ी कुछ ज़्यादा नहीं हो रही थी?

वह जवाब देने ही वाला था कि तभी एक जानी-पहचानी, तिरस्कार भरी आवाज़ सुनाई दी, “राइडर, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

आवाज़ सुनते ही राइडर ने सिर उठाया—टिम रेस्तराँ से बाहर निकल रहा था।

तभी राइडर को याद आया कि टिम ने आज पहले क्लास के ग्रुप में मैसेज डाला था—आज रात ‘द पिंट हाउस’ में वो सबको डिनर करा रहा है।

कितनी छोटी दुनिया है, फिर से आमना-सामना हो गया!

टिम राइडर के पास आया, त्योरी चढ़ाकर डाँटा, “कंपनी का नियम है—छह बजे छुट्टी। अभी छह भी नहीं हुए और तुम पहले ही चुपके से निकल आए। अभी-अभी जॉइन किया है और जल्दी भाग रहे हो। हिम्मत देखो!”

राइडर के मुँह से शब्द ही नहीं निकले।

मन ही मन उसने कहा, ये आदमी तो एक्टिंग करने में उस्ताद है!

आज दिन भर में इतना कुछ हो चुका था कि उसे अभी तक हिसाब बराबर करने का मौका ही नहीं मिला था। चलो, अब देखते हैं ये कितनी अकड़ दिखाता है।

राइडर ने पलटकर कहा, “अगर छह बजे छुट्टी है, तो आप जल्दी जाने के लिए छुट्टी लेकर आए हैं क्या?”

टिम ने घमंड से राइडर को ऊपर-नीचे देखा और बोला, “मुझे जब चाहूँ आने-जाने का अधिकार है।”

“मैं एचआर संभालता हूँ। छुट्टी न भी लूँ तो क्या? अभी के अभी कंपनी वापस जाओ और आत्मालोचना लिखो। नहीं तो सैलरी काट दूँगा!”

उसी वक्त धूप के चश्मे वाली औरत ने चश्मा उतारा और हँसकर कहा, “अरे, मुझे लगा ये जाना-पहचाना लग रहा है। ये तो वही अंडरवियर चोर है—राइडर!”

“हार्पर?” राइडर थोड़ा चौंका।

हार्पर टेलर उसके हाई स्कूल की क्लास में कल्चरल/एंटरटेनमेंट की इंचार्ज थी—फिगर और शक्ल ठीक-ठाक। स्कूल में वो सिगरेट पीती, लड़ती-झगड़ती, टैटू बनवाती और आवारा लड़कों के साथ घूमती रहती थी। बारहवीं के मेडिकल में पता चला था कि वो प्रेग्नेंट थी। फिर भी स्कूल में उसकी बदनामी राइडर से कम थी।

हार्पर ने चेहरे पर जरूरत से ज्यादा बोटॉक्स कराया था और ऊपर से चश्मा लगाए थी, इसलिए राइडर उसे पहचान नहीं पाया था।

“तो तू ही है… इतने साल बाद भी तेरा मिज़ाज वैसा ही है!” राइडर से बुदबुदाए बिना रहा नहीं गया।

हार्पर आँखें तरेरकर बोली, “क्या कहा? यकीन मानो, मैं अपने लोग भेजकर तुझे सीधा करवा दूँ!”

टिम बीच में कूद पड़ा, “हार्पर, इस निकम्मे के लिए क्यों समय खराब कर रही हो? अंदर सब लोग इंतज़ार कर रहे हैं—देखने के लिए कि हमारी क्लास की ‘सुंदरी’ कितनी बदल गई!”

हार्पर ने बनावटी शर्म से टिम को हल्का-सा थपथपाया, “कौन सी क्लास की सुंदरी? मैं तो अब आंटी हूँ!”

कहते हुए भी उसके चेहरे पर इतराहट वाली मुस्कान रोकी नहीं जा रही थी।

“अगर तुम आंटी हो, तो दुनिया में फिर कोई जवान लड़की बची ही नहीं!” टिम जानबूझकर हार्पर के और पास झुका और अपनी बाँह उसकी कमर से रगड़ दी।

हार्पर ने मना नहीं किया—कमर मटकाई और आँखों से शरारती इशारे किए।

अचानक हार्पर को कुछ सूझा। होंठों के कोनों पर मुस्कान खेल गई। वो टिम से बोली, “जब क्लास की गेट-टुगेदर है, तो इसे भी अंदर ले चलें ना?”

टिम एक पल को हिचकिचाया।

सच कहें तो वो राइडर को अंदर नहीं ले जाना चाहता था।

पहली बात, सुबह वाला व्हाट्सऐप वाला बवाल राइडर की वजह से हुआ था, और टिम को डर था कि कहीं कोई उसे अंदर छेड़ दे और बात बढ़ जाए।

दूसरी बात, वो पहले ही सबको खिलाने में खूब पैसा लगा चुका था और शान दिखाना चाहता था। राइडर को अंदर लाता तो एक खर्च और बढ़ता।

हार्पर ने जानबूझकर टिम की बाँह से और सटकर, नखरे से कहा, “क्लास प्रेसिडेंट, आप तो बड़े दिलवाले हैं। क्या आप नहीं चाहेंगे कि हमारे पुराने क्लासमेट का ‘करिश्मा’ भी सब देखें?”

टिम ने आँखें सिकोड़ लीं—उसकी नज़दीकी का मज़ा लेते हुए।

थोड़ा सोचकर उसे लगा, राइडर को अंदर लाकर सबके सामने बेइज़्ज़त किया तो उसकी अपनी ‘कामयाबी’ और चमकेगी। घाटा नहीं!

वो राइडर की तरफ मुड़ा, “आज तुम्हारी किस्मत अच्छी है। आत्मालोचना कल लिख देना। अभी मेरे साथ अंदर चलो, मज़ा करो, खाना खा लो।”

हार्पर भी बोली, “किसका इंतज़ार कर रहे हो? अभी नहीं गए तो क्लासमेट्स के सामने हमारी ही बेइज़्ज़ती हो जाएगी!”

“ठीक है, मैं चलता हूँ!” राइडर भी देखना चाहता था कि ये लोग क्या खेल खेल रहे हैं।

वह टिम और हार्पर के पीछे-पीछे रेस्तराँ में चला गया।

एंट्रेंस के पास से गुजरते हुए, राइडर ने साफ़ सुना—रिसेप्शन पर बैठी लड़की तिरछी हँसी हँसकर बोली, “गरीब कहीं का… किसी का भी खाना झपटने आ जाता है। कितनी बेशर्मी!”

राइडर ने बहस करना ज़रूरी नहीं समझा।

उसने फोन निकाला और सोफी को कॉल किया।

तीनों दूसरे माले पर एक प्राइवेट रूम में पहुँचे।

टिम ने दरवाज़ा धक्का देकर खोला और जोर से बोला, “बताओ तो सही, कौन आया है?”

कमरे में दस क्लासमेट्स थे—छह लड़के और चार लड़कियाँ।

लड़कों ने हार्पर को देखते ही फौरन खड़े होकर उसकी तारीफों की बरसात कर दी।

बात ज़्यादातर उसके फिगर की ही हो रही थी—और यह कि वह दिन-ब-दिन और भी खूबसूरत होती जा रही है।

दो लड़कों ने तो सीटी तक बजा दी।

लड़कियाँ उसे जलन भरी नज़रों से देखने लगीं।

हार्पर पूरा माहौल एंजॉय कर रही थी—जैसे कोई छोटी-सी घमंडी मोरनी। वह इठलाती हुई चली, बैठने से पहले चलते-चलते कमर भी मटका गई।

तभी एक क्लासमेट ने अचानक कहा, “अरे, दरवाज़े पर वो राइडर तो नहीं है? ये भी यहाँ क्यों आया है?”

इस बात ने सबका ध्यान खींच लिया और लोग शिकायतें करने लगे—

“इसे देखते ही मेरी भूख मर जाती है!”

“सुना है इसकी बहन को ऑपरेशन चाहिए, अस्पताल में है। आज ज़रूर पैसे उधार माँगने आया होगा!”

“सावधान रहो, अपने पर्स सँभालकर। उधार नहीं मिला तो चोरी भी कर सकता है। हाई स्कूल में चोर था!”

“हाँ, और लड़कियों की अंडरवियर भी चुराता था। कितना घटिया परवर्ट!”

हर कोई जो मन में था, बोलता चला गया। वहाँ मौजूद हर व्यक्ति ने साफ़-साफ़ सुना।

टिम को यह सब सुनकर अच्छा लगा, लेकिन उसने जेंटलमैन बनने का दिखावा करते हुए हाथ उठाया, “सब लोग, बस करो। आखिर हम क्लासमेट रहे हैं। राइडर जब समाज में बिल्कुल नीचे तक गिर चुका है, तो हम यूँ मुँह नहीं फेर सकते। आज ही मैंने अपनी कंपनी में इसके लिए एक नौकरी ढूँढ़ी है, इसलिए इसे साथ खाने पर ले आया।”

एक लड़की ने पूछा, “राइडर के लिए कैसी नौकरी ढूँढ़ी है?”

टिम ने ऊँची आवाज़ में ऐलान किया, “टॉयलेट साफ़ करने की—दो हज़ार डॉलर महीना!”

सब हँसने लगे, पेट पकड़कर। “हाहा, टॉयलेट साफ़ करना—एकदम उसी के लायक!”

“दो हज़ार महीना? ये तो मैं एक महीने में मेकअप पर उड़ा देती हूँ!”

लेकिन तभी एक लड़की ने अचानक हँसी काटते हुए कहा, “बस भी करो तुम लोग। हम यहाँ क्लास रीयूनियन के लिए आए हैं। किसी का मज़ाक उड़ाने से क्या मिलता है?”

जिस लड़की ने कहा, उसके नैन-नक्श नाज़ुक थे, गेहुँआ रंग, और कैज़ुअल जीन्स में उसका शानदार फिगर और भी ढका-ढका सा लग रहा था। कद साढ़े पाँच फुट से ऊपर था।

उसके चमकते, काले घने बाल कंधों पर बिखरे थे, और उसके व्यक्तित्व में एक अलग ही ठहराव था।

लिली टर्नर!

राइडर की हाई स्कूल की क्लासमेट।

राइडर की उसके बारे में सबसे पक्की याद यही थी कि वह तब खेलों में बहुत अच्छी थी, बाल छोटे रखती थी, और लड़कों जैसी बेफिक्री वाली, खुली-खुली शख्सियत थी।

किसी ने उसे पटाने की कोशिश की थी और बदले में पिटकर रोता हुआ निकला था। वह ह्यूस्टन हाई की “क्वीन” थी!

इसी वजह से स्कूल के ज़्यादातर लड़के उससे दूरी बनाकर रखते थे।

मगर उस समय राइडर की उससे अच्छी बनती थी। खासकर जब राइडर पर पैसे और अंडरवियर चोरी करने का झूठा इल्ज़ाम लगा था, तब लिली ही अकेली थी जिसने उसके पक्ष में आवाज़ उठाई थी।

हालाँकि उसके कुछ ही समय बाद, न जाने किस वजह से, वह अचानक स्कूल बदलकर चली गई। फिर उनका कभी संपर्क नहीं हुआ।

किसने सोचा था कि इतने सालों बाद लिली इतनी बड़ी बदलाव के साथ एक बेहद खूबसूरत लड़की बनकर सामने आएगी!

लिली की बात के बाद कई क्लासमेट नज़रें चुराने लगे।

हँसी रुक गई। इसका मतलब यह था कि ह्यूस्टन हाई की “क्वीन” की ढाल मिल जाने पर भी राइडर की कुछ तो हैसियत बची हुई थी। हालांकि अब कोई राइडर का मज़ाक नहीं उड़ा रहा था, मगर कोई उसे स्वागत भी नहीं कर रहा था—उसके पास कोई सीट खाली नहीं थी। आखिर में लिली ने खुद आगे बढ़कर राइडर को अपने पास बैठा लिया।

सबके बैठ जाने के बाद अलग-अलग बातें शुरू हो गईं।

लड़कों की तरफ टिम अगुआ बनकर काम, सैलरी, और किन बड़े लोगों से जान-पहचान है—इसी पर डींगें हाँकने लगा।

लड़कियों की तरफ हार्पर के नेतृत्व में ज़्यादातर चर्चा मेकअप, बैग खरीदने, और किस सहेली का अमीर “रिच किड” बॉयफ्रेंड है—इसी के इर्द-गिर्द घूमती रही।

ये तथाकथित क्लास रीयूनियन असल में दिखावे की होड़ से ज़्यादा कुछ नहीं था। राइडर उनकी बातचीत में शामिल नहीं हुआ। वह लिली से अलग से बात करता रहा।

राइडर ने महसूस किया कि कभी उछलती-कूदती, बेधड़क टॉमबॉय अब ज्यादा नारीसुलभ हो गई थी।

मगर उसका स्वभाव नहीं बदला था; उसे नाइंसाफी से नफ़रत थी और वह राइडर के उन क्लासमेट्स को तुच्छ समझती थी।

कुछ लड़कों ने उसके करीब आने की कोशिश की, लेकिन लिली की तिरस्कार भरी नज़र पड़ते ही वे पीछे हट गए।

यह देखकर राइडर बस मुस्कुरा सका और उसे शांत रहने को कहा। थोड़ी देर बाद क्लास टीचर, मिस्टर ब्लेयर, पहुँच गए।

टीचर और छात्रों के बीच औपचारिक हालचाल हुआ। राइडर उठा और शालीनता से मिस्टर ब्लेयर को नमस्ते की।

लेकिन टीचर ने उसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। नतीजा यह हुआ कि राइडर एक बार फिर क्लासमेट्स की तानों-ठिठोलियों का निशाना बन गया।

और दस मिनट बीते ही थे कि प्राइवेट रूम का दरवाज़ा धकेलकर खोला गया। एक महिला जल्दी-जल्दी अंदर आई।

उसने सफेद ड्रेस पहन रखी थी, उसके व्यक्तित्व में एक खास नज़ाकत थी। वह बहुत खूबसूरत थी।

“सॉरी, देर हो गई—रास्ते में ट्रैफिक था!”

उस औरत को देखते ही राइडर की नज़र वहीं ठिठक गई।

जो अंदर आई थी, वह शार्लट थॉम्पसन थी—हाई स्कूल में उसकी डेस्कमेट, उस समय की क्लास ब्यूटी—जिस पर उसे कुछ समय के लिए क्रश था, और जो एक गलतफ़हमी के कारण अधूरा रह गया था।

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